तकनीकी रूप से अंतरिम बजट चुनावी साल में कुछ वक्त तक देश को चलाने के लिए खर्चों का इंतजाम करने की औपचारिकता है। नई सरकार बनाने के लिए जो समय होता है, उस अवधि के लिए अंतरिम बजट संसद में पेश किया जाता है। इस बजट में कोई भी ऐसा फैसला नहीं किया जाता है जिसमें ऐसे नीतिगत फैसले हों जिसके लिए संसद की मंजूरी लेनी पड़े या फिर कानून में संशोधन की जरूरत हो। अंतरिम बजट की परंपरा है कि इसमें डायरेक्ट टैक्स, जिसमें इनकम टैक्स शामिल है, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाता। इनडायरेक्ट टैक्सों में भी कम ही बदलाव किया जाता है। सरकार अगर कोई चीज सस्ती करनी चाहे तो वह इंपोर्ट, एक्साइज या सर्विस टैक्स में थोड़ी राहत देती है। अमूमन यह देखा गया है कि अगर किसी और पार्टी की सरकार केंद्र में बनती है तो वह बजट में लिए गए कदमों में बदलाव कर देती है। वह अपनी सोच और नीति के साथ बजट तय करती है। इसलिए अंतरिम बजट में कुछ भी कदम उठाने से बचा जाता है।

iibm

monster






ADVERTISEMENTS

copyrightimage